उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahut shadab ho lekin bayabani nahin jati

बहुत शादाब हो लेकिन बयाबानी नहीं जाती

بہت شاداب ہو لیکن بیابانی نہیں جاتی

शायर: Naeem Sameer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहुत शादाब हो लेकिन बयाबानी नहीं जाती
कि बाम-ए-औज छूने से भी अर्ज़ानी नहीं जाती

कई चेहरों ने आवाज़ों ने दिल आबाद रक्खा है
मगर आँखों में रक़्साँ है जो वीरानी नहीं जाती

मुझे अपनी नुमू के वास्ते तुम से बिछड़ना है
तुम्हारे साथ रहने से तन-आसानी नहीं जाती

मैं इस दिल की सभी सच्चाइयाँ तस्लीम करता हूँ
मगर इक बात ऐसी भी है जो मानी नहीं जाती

हुजूम-ए-शोर-ओ-ग़ुल में कौन था किस ने पुकारा था
यहाँ तो अपनी भी आवाज़ पहचानी नहीं जाती

'समीर' इस इश्क़ में इंसान क्या इतना बदलता है
मैं ख़ुद पर ग़ौर करता हूँ तो हैरानी नहीं जाती