उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zahir se bhi bad-tar hai jo haalat hai darun ki

ज़ाहिर से भी बद-तर है जो हालत है दरूँ की

ظاہر سے بھی بد تر ہے جو حالت ہے دروں کی

शायर: Faisal Tufail5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ाहिर से भी बद-तर है जो हालत है दरूँ की
फिर भी नहीं करता हूँ शिकायत मैं जुनूँ की

इक वस्ल पे मौक़ूफ़ है अब हिज्र सँभलना
इस गिरती हुई छत को ज़रूरत है सुतूँ की

दिल इस को भी इक़रार समझने पे तुला है
सौ बार जो पूछा तो फ़क़त हल्की सी हूँ की

अब जाओ ना तुम तोड़ के ले आओ सितारे
जब कर नहीं सकते थे तो फिर बात ही क्यों की

कुछ ख़ास रहा है मिरा गर्दिश से त'अल्लुक़
रहने नहीं देता है जो बाँहों में सुकूँ की