उर्दू शायरी · ग़ज़ल

darun-e-KHwab ye manzar dikhai deta hai

दरून-ए-ख़्वाब ये मंज़र दिखाई देता है

درون خواب یہ منظر دکھائی دیتا ہے

शायर: Faisal Tufail5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दरून-ए-ख़्वाब ये मंज़र दिखाई देता है
फ़लक पे जलता हुआ पर दिखाई देता है

कोई शिकस्ता सितारा अँधेरी रातों में
मिरी तलाश में अक्सर दिखाई देता है

सजा के रखता हूँ आईने चार सम्त कि यूँ
बस इक चराग़ भी लश्कर दिखाई देता है

सुनाई देती है धड़कन हर एक पत्थर में
हर इक चटान में पैकर दिखाई देता है

मिरा वुजूद अगर आइने से बाहर है
वो कौन है कि जो अंदर दिखाई देता है