उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek bar jo mila tha to khoya nahin gaya

इक बार जो मिला था तो खोया नहीं गया

اک بار جو ملا تھا تو کھویا نہیں گیا

शायर: Faisal Tufail7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक बार जो मिला था तो खोया नहीं गया
इस तरह वो गया है कि गोया नहीं गया

कल रात तेरी याद थी कमरे में या कि तू
इस दर्जा रौशनी थी कि सोया नहीं गया

मुझ को ये ए'तिराफ़ है कि ना-तवाँ हूँ मैं
मुझ से मिरा वुजूद भी ढोया नहीं गया

आँसू ठहर गए हैं मिरे उस के गाल पर
शबनम से इस गुलाब को धोया नहीं गया

फिर मैं ने क़हक़हे का सहारा लिया है आज
दुख इस क़दर ज़ियादा था रोया नहीं गया

वो लुत्फ़-'इश्क़ हो कि सितम-हा-ए-रोज़गार
मुझ को किसी लड़ी में पिरोया नहीं गया

फिर किस समर की तुम हो तमन्ना लिए हुए
गर ख़ुद को भी ज़मीन में बोया नहीं गया