उर्दू शायरी · ग़ज़ल

duniya ki rah pe yar hamara bhi chal paDa

दुनिया की रह पे यार हमारा भी चल पड़ा

دنیا کی رہ پہ یار ہمارا بھی چل پڑا

शायर: Faisal Tufail5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुनिया की रह पे यार हमारा भी चल पड़ा
जिस टेक पर थे हम वो सहारा भी चल पड़ा

आँखें बंधी हुई थीं मनाज़िर की डोर से
कश्ती चली तो साथ किनारा भी चल पड़ा

हालाँकि आज़माया हुआ था वो एक बार
लेकिन मैं उस के साथ दुबारा भी चल पड़ा

मुश्किल था इंतिज़ार सो सूरज को ढूँडने
हमराह मेरे सुब्ह का तारा भी चल पड़ा

दिल में जो आग थी वही होंटों पे आ गई
लफ़्ज़ों की आड़ ले के शरारा भी चल पड़ा