उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun to mera us se koi parda bhi nahin hai

यूँ तो मिरा उस से कोई पर्दा भी नहीं है

یوں تو مرا اس سے کوئی پردہ بھی نہیں ہے

शायर: Tabish Mehdi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तो मिरा उस से कोई पर्दा भी नहीं है
लेकिन कभी मैं ने उसे देखा भी नहीं है

इंसान है वो कोई फ़रिश्ता भी नहीं है
उस सा कोई दुनिया में निराला भी नहीं है

दुनिया में किसी को कभी कमतर नहीं समझा
मैं कौन हूँ क्या हूँ कभी सोचा भी नहीं है

क्या जानिए क्यों लोग गुज़र जाते हैं कट कर
मेरा तो किसी से कोई रिश्ता भी नहीं है

दुश्मन से फ़ुज़ूँ-तर है निगहबान की क़ुव्वत
शायद मिरे दुश्मन ने ये सोचा भी नहीं है

क्यों मेरी सदा सुन के ज़माना है ग़ज़ब में
ऐसा कोई ऊँचा मिरा लहजा भी नहीं है

क्यों मेरे लिए दार सजाया गया 'ताबिश'
मैं ने तो किसी को कभी टोका भी नहीं है