उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aur samt-e-safar rasta aur hai

और सम्त-ए-सफ़र रास्ता और है

اور سمت سفر راستہ اور ہے

शायर: Tabish Mehdi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

और सम्त-ए-सफ़र रास्ता और है
‘अहद-ए-हाज़िर का शायद ख़ुदा और है

आँधियाँ किस लिए मुतमइन हो गईं
मेरे घर में अभी इक दिया और है

झूटी ख़बरों की तशहीर मत कीजिए
मेरी बस्ती का वो वाक़ि'आ और है

'आफ़ियत की तमन्ना मुनासिब नहीं
बाक़ी इक 'अर्सा-ए-कर्बला और है

हम तमन्ना-ए-ख़त्म-ए-सफ़र क्यों करें
इस सफ़र की थकन का मज़ा और है

आप का शहर दिलकश बहुत है मगर
गाँव की मेरे आब-ओ-हवा और है

अपनी पहचान भी अब तो मुमकिन नहीं
हम ही बदले हैं या आइना और है

शीश-महलों में 'ताबिश' को मत ढूँढिए
इस क़लंदर के घर का पता और है