उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHata maine koi bhaari nahin ki

ख़ता मैं ने कोई भारी नहीं की

خطا میں نے کوئی بھاری نہیں کی

शायर: Tabish Mehdi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ता मैं ने कोई भारी नहीं की
अमीर-ए-शहर से यारी नहीं की

मिरे ऐबों को गिनवाया तो सब ने
किसी ने मेरी ग़म-ख़्वारी नहीं की

मिरे शेरों में क्या तासीर होती
कभी मैं ने अदाकारी नहीं की

किसी मंसब किसी ओहदे की ख़ातिर
कोई तदबीर बाज़ारी नहीं की

बस इतनी बात पर दुनिया ख़फ़ा है
कि मैं ने तुझ से ग़द्दारी नहीं की