उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kinayatan bhi tera nam jab suna maine

किनायतन भी तिरा नाम जब सुना मैं ने

کنایتاً بھی ترا نام جب سنا میں نے

शायर: Tabish Mehdi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किनायतन भी तिरा नाम जब सुना मैं ने
वुफ़ूर-ए-शौक़ में सर को झुका दिया मैं ने

हुजूम-ए-ग़म में अदा-ए-क़लंदरी न गई
मसर्रतों से भी रक्खा है फ़ासला मैं ने

बुतों ने हौसला-अफ़ज़ाइयाँ तो कीं मेरी
मगर तुझी को पुकारा मिरे ख़ुदा मैं ने

तमाम 'उम्र अँधेरों से मेरी जंग रही
बुझा चराग़ तो दिल को जला लिया मैं ने

तमाम शहर के पत्थर मिरी तरफ़ आए
ख़िरद को जब भी दिखाया है आइना मैं ने

मिरे ख़ुदा मिरे शे'रों को ज़िंदगी दे दे
हर एक शे'र पे माँगी है ये दु'आ मैं ने