उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun to KHud apne hi sae se bhi Dar jate hain log

यूँ तो ख़ुद अपने ही साए से भी डर जाते हैं लोग

یوں تو خود اپنے ہی سائے سے بھی ڈر جاتے ہیں لوگ

शायर: Nafas Ambalvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तो ख़ुद अपने ही साए से भी डर जाते हैं लोग
हादसे कैसे भी हों लेकिन गुज़र जाते हैं लोग

जब मुझे दुश्वारियों से रू-ब-रू होना पड़ा
तब मैं समझा रेज़ा रेज़ा क्यूँ बिखर जाते हैं लोग

सिर्फ़ ग़ाज़ा ही नहीं चेहरों की रा'नाई का राज़
शिद्दत-ए-ग़म की तपिश से भी निखर जाते हैं लोग

मसअले आ कर लिपट जाते हैं बच्चों की तरह
शाम को जब लौट कर दफ़्तर से घर जाते हैं लोग

हर 'नफ़स' मर मर के जीते हैं तुझे ऐ ज़िंदगी
और जीने की तमन्ना में ही मर जाते हैं लोग