उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baat karte ho to takrar ki bu aati hai

बात करते हो तो तकरार की बू आती है

بات کرتے ہو تو تکرار کی بو آتی ہے

शायर: Nafas Ambalvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बात करते हो तो तकरार की बू आती है
यार तुम से किसी बीमार की बू आती है

चाय के साथ ये ख़बरें न पढ़ा कर वर्ना
मुँह से दिन भर उसी अख़बार की बू आती है

आप कह कर न हो तू मुझ से मुख़ातिब ऐ दोस्त
मुझ को इस लफ़्ज़ से अग़्यार की बू आती है

तेरी गुफ़्तार से होता है तिजारत का गुमाँ
तेरे लहजे से ख़रीदार की बू आती है

पहले ख़ुशबू की तरह लोग महकते थे यहाँ
अब तो गिरते हुए मे'यार की बू आती है

वो जो इस शहर में कुछ लोग हैं उजले उजले
अब मुझे उन से गुनहगार की बू आती है

तेरे अख़्लाक़ में इक मुश्क-फ़िशानी है 'नफ़स'
तेरे किरदार से ख़ुद्दार की बू आती है