उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bazi agarche zist ki hum haar to gae

बाज़ी अगरचे ज़ीस्त की हम हार तो गए

بازی اگرچہ زیست کی ہم ہار تو گئے

शायर: Nafas Ambalvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बाज़ी अगरचे ज़ीस्त की हम हार तो गए
लेकिन जो दिल पे नक़्श थे आज़ार तो गए

कितने शनावरों को ये दरिया निगल गया
तुग़्यानियों में डूब के हम पार तो गए

बारिश का ज़ोर है मिरे ख़स्ता मकान पर
लगता है अब के ये दर-ओ-दीवार तो गए

हम लोग अब क़दीम नुमाइश की चीज़ हैं
बाज़ार से अब अपने ख़रीदार तो गए

वो दरमियाँ ग़ज़ल के जो उठ कर चला गया
ऐ बज़्म-ए-शा'इरी तिरे मे'यार तो गए

लगता है अब के जान ही जाएगी एक दिन
इस शा'इरी के शौक़ में घर-बार तो गए

चल ऐ 'नफ़स' कि हम भी कहीं और जा बसें
दो-चार थे जो शहर में ग़म-ख़्वार तो गए