उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun to kahne ko mere KHun ke pyase hain sabhi

यूँ तो कहने को मिरे ख़ून के प्यासे हैं सभी

یوں تو کہنے کو مرے خون کے پیاسے ہیں سبھی

शायर: Kaifi Sanbhali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तो कहने को मिरे ख़ून के प्यासे हैं सभी
सर क़लम कौन करेगा कि निहत्ते हैं सभी

कल जो मस्जिद में गए हम तो ये महसूस हुआ
एक हम ही हैं गुनहगार फ़रिश्ते हैं सभी

अब ये क्यों मेरी ज़बाँ काट रहे हो साहब
तुम तो कहते थे कि इस शहर में गूँगे हैं सभी

क़द बढ़ा दे मिरा या शाख़ों को नीचा कर दे
जिस क़दर फल हैं मिरे हाथ से ऊँचे हैं सभी

ख़ुद को अब बेचने निकलोगे तो जाओगे कहाँ
जितने बाज़ार में सिक्के हैं वो खोटे हैं सभी