उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne sab zaKHmon pe hum soe the aansu bandh kar

अपने सब ज़ख़्मों पे हम सोए थे आँसू बाँध कर

اپنے سب زخموں پہ ہم سوئے تھے آنسو باندھ کر

शायर: Kaifi Sanbhali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने सब ज़ख़्मों पे हम सोए थे आँसू बाँध कर
आ गईं पुरवाइयाँ पैरों में घुँगरू बाँध कर

एक इक कर के तिरी यादों की सारी तितलियाँ
हो गईं रुख़्सत मिरी पलकों में जुगनू बाँध कर

मंज़िलत से मेरी ना-वाक़िफ़ न थे मजबूर थे
रो पड़े दुश्मन मिरे रस्सी में बाज़ू बाँध कर

ख़ुश-नसब लोगों के बेटों को नहीं इस की ख़बर
शेर मारे जाएँगे जंगल में आहू बाँध कर

माल और दौलत की ऐ 'कैफ़ी' तमन्ना किस लिए
साथ ले जाएगा दुनिया से तू क्या क्या बाँध कर