उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye mat samajh ki chand-sitaron ke sath hun

ये मत समझ कि चाँद-सितारों के साथ हूँ

یہ مت سمجھ کہ چاند ستاروں کے ساتھ ہوں

शायर: Kaifi Sanbhali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये मत समझ कि चाँद-सितारों के साथ हूँ
सूरज नहीं है बा'द में जिस के वो रात हूँ

जो दोस्ती का फ़र्ज़ निभाने में कट गया
मैं ख़ाक पर पड़ा वो मोहब्बत का हात हूँ

ये तेरे मेरे बीच नहीं जंग आख़िरी
तू भी अभी हयात है मैं भी हयात हूँ

अहबाब मुझ को छोड़ रहे हैं तो छोड़ जाएँ
मैं आप अपनी ज़ात में इक काएनात हूँ

ये लोग मुझ को ज़हर बनाने पे हैं मुसिर
वर्ना मिज़ाज से तो मैं आब-ए-हयात हूँ

क़तरे से भी हूँ कम ये समुंदर का इंकिसार
क़तरे को ये गुमाँ कि समुंदर-सिफ़ात हूँ

'कैफ़ी' मैं जैसे अपने बुज़ुर्गों का हूँ असा
बच्चों की भी किताब क़लम हूँ दवात हूँ