उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun talabgar ho gaya hai dil

यूँ तलबगार हो गया है दिल

یوں طلب گار ہو گیا ہے دل

शायर: Kaif Uddin Khan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तलबगार हो गया है दिल
समझो बीमार हो गया है दिल

आने जाने का रास्ता ही नहीं
या'नी दीवार हो गया है दिल

पहले लाता था काम में इस को
अब तो बेकार हो गया है दिल

चोट खाता हूँ सोज़ सीने में
फूल से ख़ार हो गया है दिल

हर तमन्ना से मुत्तफ़िक़ हो कर
कितना बेज़ार हो गया है दिल