उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahm ki intiha hai kya yani

वहम की इंतिहा है क्या या'नी

وہم کی انتہا ہے کیا یعنی

शायर: Kaif Uddin Khan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वहम की इंतिहा है क्या या'नी
मसनद-ए-ज़ेहन पे ख़ुदा या'नी

सर-ब-सर भूलने की कोशिश में
मैं उसे सोचता रहा या'नी

मैं हूँ मौजूद बारहा तुझ में
हूँ मगर ख़ुद में लापता या'नी

दिल दुखाना तुझी से सीखा है
ज़हर है ज़हर की दवा या'नी

कितना दुश्वार है जिए जाना
ख़ुल्द में भी सज़ा है क्या या'नी