उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usko firaq-e-yar ka matlab nahin pata

उस को फ़िराक़-ए-यार का मतलब नहीं पता

اس کو فراق یار کا مطلب نہیں پتہ

शायर: Kaif Uddin Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस को फ़िराक़-ए-यार का मतलब नहीं पता
मतलब उसे भी प्यार का मतलब नहीं पता

मरना तो चाहते हैं मगर क्या करें कि जब
साँसों को इख़्तियार का मतलब नहीं पता

मुझ को भी अब यक़ीन किसी बात पर नहीं
उस को भी ए'तिबार का मतलब नहीं पता

रखते हो तुम हिसाब ग़म-ए-ज़िंदगी का जो
क्या तुम को बे-शुमार का मतलब नहीं पता

उस से गिला करें भी अगर हम तो किस लिए
जिस को कि ग़म-गुसार का मतलब नहीं पता

गो कर रहा है गुल की हिफ़ाज़त शजर मगर
पतझड़ को नौ-बहार का मतलब नहीं पता