उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun shahr ke bazar mein kya kya nahin milta

यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता

یوں شہر کے بازار میں کیا کیا نہیں ملتا

शायर: Sabihuddin Shoaiby5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता
पर हुस्न में सानी कोई तेरा नहीं नहीं मिलता

जो कुछ दिल-ए-नाकाम ने चाहा नहीं मिलता
मंज़िल नहीं मिलती कभी रस्ता नहीं मिलता

लहजा नहीं मिलता कभी चेहरा नहीं मिलता
दुनिया में हमें एक भी तुम सा नहीं मिलता

छोड़ा है जो इक घर को तो दूजा नहीं मिलता
अब दिल सा तिरे कोई ठिकाना नहीं मिलता

आती है ख़ुशी गर तो वो मिलती है अधूरी
ग़म जब कभी मिलता है अकेला नहीं मिलता