उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek bikharte aashiyan ki baat hai

इक बिखरते आशियाँ की बात है

اک بکھرتے آشیاں کی بات ہے

शायर: Sabihuddin Shoaiby7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक बिखरते आशियाँ की बात है
इक शिकस्ता साएबाँ की बात है

मेरे माथे के निशाँ की बात है
उन के संग-ए-आस्ताँ की बात है

दर्द-ओ-ग़म के क़ाफ़िले का ज़िक्र है
अश्क की मौज-ए-रवाँ की बात है

रूह का रिश्ता है ये तेरा मिरा
ये भला कब जिस्म-ओ-जाँ की बात है

लोग जो कहते हैं तुम को बेवफ़ा
तुम बताओ ये कहाँ की बात है

ज़ख़्म भर कर फिर हरे कैसे हुए
बस कफ़-ए-चारा-गराँ की बात है

सच वही है जो अभी मैं ने कहा
बाक़ी ज़ेब-ए-दास्ताँ की बात है