उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main jo kahta hun tu kajrawi chhoD de

मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे

میں جو کہتا ہوں تو کجروی چھوڑ دے

शायर: Sabihuddin Shoaiby6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे
वो ये कहती है तू दोस्ती छोड़ दे

मैं ये कहता हूँ मुझ को दिवाना बना
वो ये कहती है दीवानगी छोड़ दे

जब मैं तारीफ़ करता हूँ उस की कभी
तब वो कहती है बस शाइ'री छोड़ दे

जब कभी दिल की बातें बताता हूँ मैं
तब वो कहती है अब दिल लगी छोड़ दे

जब मैं कहता हूँ है जान हाज़िर मिरी
वो ये कहती है अब जाँ मिरी छोड़ दे

जब मैं कहता हूँ जीना है मुश्किल बहुत
तब वो कहती है जा ज़िंदगी छोड़ दे