उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun mausamon ke sath bhi laDna zarur tha

यूँ मौसमों के साथ भी लड़ना ज़रूर था

یوں موسموں کے ساتھ بھی لڑنا ضرور تھا

शायर: Kaifi Sanbhali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ मौसमों के साथ भी लड़ना ज़रूर था
लेकिन शजर था मैं तो उजड़ना ज़रूर था

अब मुज़्तरिब हैं लम्स से महरूम उँगलियाँ
बचपन में तितलियों को पकड़ना ज़रूर था

तक़दीर में भी लिक्खा था इक प्यास का सफ़र
दरिया भी मेरी राह में पड़ना ज़रूर था

रहते भी कितनी देर हवाओं के दोष पर
हर तीर को ज़मीन पे गिरना ज़रूर था

'कैफ़ी' हमें भी कुछ तो मसाफ़त का इल्म था
इक संग-ए-मील राह में गड़ना ज़रूर था