उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye zamin aasman rahne de

ये ज़मीं आसमान रहने दे

یہ زمیں آسمان رہنے دے

शायर: Om Prakash Meghwanshi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये ज़मीं आसमान रहने दे
कोई तो साएबान रहने दे

हम ग़रीबों की शान रहने दे
कुछ तो कच्चे मकान रहने दे

मेरा हाकिम भी कुछ नहीं सुनता
मुझ को भी बे-ज़बान रहने दे

ये बहुत ऊपरी मसाइल हैं
बिन परों के उड़ान रहने दे