उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek nam hi ke bais adab hai kamal hai

एक नाम ही के बाइ'स अदब है कमाल है

ایک نام ہی کے باعث ادب ہے کمال ہے

शायर: Om Prakash Meghwanshi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक नाम ही के बाइ'स अदब है कमाल है
दिखता नहीं है फिर भी वो रब है कमाल है

होते हुए भी मेरा यहाँ कुछ नहीं अज़ीज़
वो है नहीं पर उस का ये सब है कमाल है

मैं ख़ाक था सो ख़ाक को फिर ख़ाक होना है
ये वाक़िआ' भी दुख का सबब है कमाल है