उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye un se milti hai mubtala nain

ये उन से मिलती है मुब्तला नईं

یہ ان سے ملتی ہے مبتلا نئیں

शायर: Ejaaz tawakkal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये उन से मिलती है मुब्तला नईं
हवा दरख़्तों की दाश्ता नईं

वफ़ा का सुन कर मलाल मत कर
ये पेशकश है मुतालबा नईं

यक़ीन से इश्क़ हो रहा है
किसी को फ़िक्री मुग़ालता नईं

फ़सुर्दा लोगों पे हँसने वालो
ये बद-तमीज़ी की इंतिहा नईं

नज़र नज़र से सुख़न करेगी
ये लब-कुशाई का मरहला नईं

मैं चल पड़ूँगा किसी भी लम्हे
थका हुआ हूँ शिकस्ता-पा नईं

ये हिज्र है अपने साथ रहना
ये वक़्त ख़ुद से गुरेज़ का नईं

मुझे बहुत देखती है दुनिया
मगर मैं दुनिया को देखता नईं