उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye teri jo parchhai hai

ये तेरी जो परछाई है

یہ تیری جو پرچھائی ہے

शायर: Habib Rehman8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये तेरी जो परछाई है
लगता है शामत आई है

उस ने एक नज़र देखी और
मौत घटा बन कर छाई है

ऐसे दस्तक दी है दिल पर
जान ज़रा सी घबराई है

मैं ने के ख़ुश-फ़हमी पाली
वो भी थोड़ा इतराई है

मैं पूरा-पूरा उस का हूँ
वो बस मेरा चौथाई है

किस मनहूस घड़ी में मेरी
तुझ से क़िस्मत टकराई है

दरवाज़ा खुलते ही मैं अब
जान गया हूँ तन्हाई है

कौन करेगा इस को पूरा
प्रेम का अक्षर तो ढाई है