उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye sab kahne ki baaten hain hum un ko chhoD baiThe hain

ये सब कहने की बातें हैं हम उन को छोड़ बैठे हैं

یہ سب کہنے کی باتیں ہیں ہم ان کو چھوڑ بیٹھے ہیں (ردیف .. ے)

शायर: Zaheer Dehlvi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये सब कहने की बातें हैं हम उन को छोड़ बैठे हैं
जब आँखें चार होती हैं मुरव्वत आ ही जाती है

वो अपनी शोख़ियों से कोई अब तक बाज़ आते हैं
हमेशा कुछ न कुछ दिल में शरारत आ ही जाती है

न उलझो ताना-ए-दुश्मन पे ऐसा हो ही जाता है
जहाँ इख़्लास होता है शिकायत आ ही जाती है

लिया जब नाम उल्फ़त का बदल जाती है सीरत भी
निगाह-ए-शर्म-आगीं में शरारत आ ही जाती है

कभी चितवन से अन-बन है कभी सौदा है गेसू का
नसीबों की ये शामत है कि शामत आ ही जाती है

हमेशा अहद होते हैं नहीं मिलने के अब उन से
वो जब आ कर लिपटते हैं मोहब्बत आ ही जाती है

कहीं आराम से दो दिन फ़लक रहने नहीं देता
हमेशा इक न इक सर पर मुसीबत आ ही जाती है

हिसाब-ए-दोस्ताँ दर-ए-दिल तक़ाज़ा है मोहब्बत का
मसल मशहूर है उल्फ़त से उल्फ़त आ ही जाती है