उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aise ki mohabbat ko mohabbat na kahenge

ऐसे की मोहब्बत को मोहब्बत न कहेंगे

ایسے کی محبت کو محبت نہ کہیں گے

शायर: Zaheer Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसे की मोहब्बत को मोहब्बत न कहेंगे
इस आम इनायत को इनायत न कहेंगे

कहिए तो कहूँ अंजुमन-ए-ग़ैर को रूदाद
क्या अब भी इसे आप करामत न कहेंगे

समझेंगे न अग़्यार को अग़्यार कहाँ तक
कब तक वो मोहब्बत को मोहब्बत न कहेंगे

जब अरबदा-जू तुम हो तो क्यूँ सब्र समेटें
हम इस में रक़ीबों की शरारत न कहेंगे

है याद 'ज़हीर' उन का शब-ए-वस्ल बिगड़ना
वो तल्ख़ी-ए-दुश्नाम की लज़्ज़त न कहेंगे