उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bigaD kar adu se dikhate hain aap

बिगड़ कर 'अदू से दिखाते हैं आप

بگڑ کر عدو سے دکھاتے ہیں آپ

शायर: Zaheer Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बिगड़ कर 'अदू से दिखाते हैं आप
बनावट की बातें बनाते हैं आप

बढ़ाने को क़िस्से शब-ए-वस्ल में
फ़साने 'अदू के सुनाते हैं आप

किसी को तजल्ली किसी को जवाब
'अजब कुछ लगाते-बुझाते हैं आप

बिगड़ने के अस्बाब लाज़िम नहीं
नई बात दिल से बनाते हैं आप

न आना था गर आए क्यूँ ख़्वाब में
मगर सोते फ़ित्ने जगाते हैं आप

बंधे क्या किसी से उमीद-ए-विसाल
नज़र से नज़र कब मिलाते हैं आप