उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye pairahan pe pairahan wabaal hai

ये पैरहन पे पैरहन वबाल है

یہ پیرہن پہ پیرہن وبال ہے (ردیف .. ر)

शायर: Naeem Sarmad10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये पैरहन पे पैरहन वबाल है
सो ख़ुद को बे-वबाल कर विसाल कर

वजूद-ए-जिस्म-ओ-जाँ से इस्तिफ़ादा कर
ज़रा समय निकाल कर विसाल कर

लहू को चुल्लुओं में ले के यूँ उड़ा
बदन पे रंग डाल कर विसाल कर

अमीर-ए-वहशियान-ए-इश्क़ हूँ सो तू
ज़रा सी देख-भाल कर विसाल कर

ये इस्म-ए-कारसाज़ है जुनून पढ़
ये होश पाएमाल कर विसाल कर

तिरी ये ज़र्द आँखें देख शर्म कर
तू इन का रंग लाल कर विसाल कर

ख़ुदा जवाब दे न दे बिगड़ पड़े
ख़ुदा से भी सवाल कर विसाल कर

विसाल-ए-यार गर हराम है तो सुन
हराम को हलाल कर विसाल कर

ख़ुदा का हिज्र अस्ल में विसाल है
सो इस में इंतिक़ाल कर विसाल कर

फ़िराक़ से गुरेज़ कर गुरेज़ कर
विसाल कर विसाल कर विसाल कर