उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab ke mausam mein tera shahr wo kaisa hoga

अब के मौसम में तिरा शहर वो कैसा होगा

اب کے موسم میں ترا شہر وہ کیسا ہوگا

शायर: Naeem Sarmad4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब के मौसम में तिरा शहर वो कैसा होगा
मेरी मर्ज़ी के बिना चाँद निकलता होगा

ये कोई बात है जो तुझ को बताई जाए
शाम के वक़्त उदासी का सबब क्या होगा

अब की सर्दी में कहाँ है वो अलाव सीना
अब की सर्दी में मुझे ख़ुद को जलाना होगा

तुझ से मिलने की कई दिन से तमन्ना है मुझे
तू कभी जिस्म से बाहर तो निकलता होगा