उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye mahakte hue jazbaat ye ashaar ke phul

ये महकते हुए जज़्बात ये अशआर के फूल

یہ مہکتے ہوئے جذبات یہ اشعار کے پھول

शायर: Hafiz Karnataki5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये महकते हुए जज़्बात ये अशआर के फूल
काश काम आएँ किसी के मिरे अफ़्कार के फूल

मेरे दिल ने जो सजा रक्खे हैं ज़ख़्मों की तरह
खिल न पाए किसी गुलशन में वो मेआ'र के फूल

सूँघती हैं उन्हें ख़ुश हो के बहिश्ती हूरें
सरफ़रोशों के बदन पर हैं जो तलवार के फूल

ये मिरे अश्क-ए-नदामत हैं ख़ुदा को महबूब
दुनिया वालों की निगाहों में हैं बे-कार के फूल

मुझ को तोहफ़े में अता उस ने किए हैं 'हाफ़िज़'
कभी इंकार के काँटे कभी इक़रार के फूल