उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye koi bagh nahin phul khilae jaen

ये कोई बाग़ नहीं फूल खिलाए जाएँ

یہ کوئی باغ نہیں پھول کھلائے جائیں

शायर: Faisal Tufail6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये कोई बाग़ नहीं फूल खिलाए जाएँ
दश्त में आए हैं तो ख़ाक उड़ाए जाएँ

सब बिठाते हैं हमें मंसब-ओ-मसनद पे मगर
हम ये चाहें कि तिरे साथ बिठाए जाएँ

उँगलियाँ कान में ठूंसे हुए फिरते हैं सभी
आप आवाज़ लगाते हैं लगाए जाएँ

बस इसी शर्त पे आँखें तुम्हें दे सकता हूँ
इन को देखे हुए मंज़र न दिखाए जाएँ

इन्हीं यादों के सहारे ही तिरा हिज्र कटे
ये परिंदे मिरी छत से न उड़ाए जाएँ

आसमाँ छूने का हक़ आप का तस्लीम हमें
कुछ त'अल्लुक़ तो ज़मीं से भी निभाए जाएँ