उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye jo har samt tere neze ki shohrat hai bahut

ये जो हर सम्त तिरे नेज़े की शोहरत है बहुत

یہ جو ہر سمت ترے نیزے کی شہرت ہے بہت

शायर: Rafiq Raaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये जो हर सम्त तिरे नेज़े की शोहरत है बहुत
सच तो ये है कि मरे सर की बदौलत है बहुत

चश्मा-ए-चशम के पानी से नहीं होगा कुछ
ख़ाक-ए-सहरा है इसे ख़ूँ की ज़रूरत है बहुत

मैं तो इक आँख हूँ आवाज़ से मुझ को न डरा
ये तिरे जलवा-ए-सद-रंग की दहशत है बहुत

बुत-ए-मअनी भी मआ'नी के पुजारी भी गए
आ कि अब मअ'बद-ए-अल्फ़ाज़ में ख़ल्वत है बहुत

ख़ाक ही शहर-ओ-बयाबाँ की अगर दौलत है
तो ये आवारा तिरा साहब-ए-सरवत है बहुत