उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai hawa-e-dayar-e-dard-o-malal

ऐ हवा-ए-दयार-ए-दर्द-ओ-मलाल

اے ہوائے دیار درد و ملال

शायर: Rafiq Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ हवा-ए-दयार-ए-दर्द-ओ-मलाल
मर्हबा मर्हबा त'आल त'आल

लफ़्ज़ गुम-सुम हैं और इन में है ग़म
मेरी ख़ामोशियों का जाह-ओ-जलाल

'अक़्ल से कस्ब-ए-रौशनी कर के
मुल्क-ए-दिल हो गया है रू-ब-ज़वाल

तू भी उस में है तेरी दुनिया भी
कितना गहरा है सोच का पाताल

पक्की सड़कों पे याद आता है
कच्चे रस्तों का सब्ज़ा-ए-पामाल

किस पे अब है चिनार का साया
इब्न-ए-जीरानिना-ओ-कैफ़ल-हाल

खोल दीवान-ए-हाफ़िज़-ए-शीराज़
फ़ाल तू अब रफ़ीक़-ए-राज़ निकाल