उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai dil-e-zar kahin nind na ho tari

ऐ दिल-ए-ज़ार कहीं नींद न हो तारी

اے دل زار کہیں نیند نہ ہو طاری

शायर: Rafiq Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ दिल-ए-ज़ार कहीं नींद न हो तारी
चश्म-ए-दरवेश भी ख़्वाबों से नहीं आरी

जिस्म का दश्त भी सुनसान है बरसों से
मुल्क-ए-दिल पर भी नहीं रूह की सरदारी

चाँद से कम न थी हम हिज्र के मारों को
उस शब-ए-तार में मौहूम सी चिंगारी

यक-ब-यक कौन मिरी फ़िक्र में दर आया
नहर-ए-ख़ुश्बू सी बयाबाँ में हुई जारी

राख के ढेर में शो'ला है कोई रक़्साँ
मेरे अंदर है अभी तक कोई इंकारी

ज़ुल्फ़-ए-पेचाँ तिरी ज़ंजीर बनेगी कब
कब 'अमल में मिरी आएगी गिरफ़्तारी