उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye ishq ki hai rah na yun Dagmaga ke chal

ये इश्क़ की है राह न यूँ डगमगा के चल

یہ عشق کی ہے راہ نہ یوں ڈگمگا کے چل

शायर: Urooj Qadri11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये इश्क़ की है राह न यूँ डगमगा के चल
हिम्मत को अपनी तोल क़दम को जमा के चल

राह-ए-वफ़ा है इस में न यूँ मुँह बना के चल
काँटों को रौंद रौंद के तू मुस्कुरा के चल

शम-ए-यक़ीं की लौ को ज़रा और तेज़ कर
ज़ुल्मत में रहरवों को भी रस्ता दिखा के चल

गर्दिश फ़लक की तेज़ है रफ़्तार तेरी सुस्त
मंज़िल है दूर अपने क़दम अब बढ़ा के चल

दुश्मन जो दोस्त के हैं वो नाराज़ हैं तो हों
सीने पे ज़ख़्म उन की जफ़ाओं का खा के चल

तीरों की बाढ़ आने दे अपने क़दम न रोक
उन की ख़ुशी यही है तू ख़ूँ में नहा के चल

बहता है ख़ूँ तो बहने दे बहने की चीज़ है
क़तरों से ख़ून-सुर्ख़ के गुलशन खिला के चल

हिम्मत के जाम सब्र के मीना से नोश कर
नक़्श-ए-क़दम से अपने तू रस्ता बना के चल

जलता रहे बस उस की तमन्ना का इक दिया
उस के सिवा हैं जितने दिए सब बुझा के चल

ऐ मीर-ए-कारवाँ तिरी ख़िदमत में अर्ज़ है
जो गिर रहे हैं राह में उन को उठा के चल

रस्ता कठिन है तू है बहुत ना-तवाँ 'उरूज'
सुल्तान-काएनात को हामी बना के चल