उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bani hui hain mere dil ki tarjuman aankhen

बनी हुई हैं मिरे दिल की तर्जुमाँ आँखें

بنی ہوئی ہیں مرے دل کی ترجماں آنکھیں

शायर: Urooj Qadri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बनी हुई हैं मिरे दिल की तर्जुमाँ आँखें
सुना रही हैं मोहब्बत की दास्ताँ आँखें

न थी ज़बाँ को इजाज़त कि हाल-ए-दिल कहती
ज़बान-ए-अश्क से करती रहीं बयाँ आँखें

कभी छुपी है मोहब्बत कि मैं छुपा लेता
ज़बाँ जो बंद हुई बन गईं ज़बाँ आँखें

बनाओ दामन-ए-सादा पे इन से गुल-बूटे
क़ुबूल हो तो करूँ नज़्र ख़ूँ-फ़िशाँ आँखें

मैं अंदलीब हूँ फूलों की दीद मेरी हयात
परों को बाँध न कर बंद बाग़बाँ आँखें

शराफ़त-ए-निगह-ए-पाक का है निगराँ दिल
तहारत-ए-दिल-ए-मोमिन की पासबाँ आँखें

'उरूज' बढ़ के करो पेश दिल का नज़राना
तुम्हीं को ताक रही हैं वो दिल-सिताँ आँखें