उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye hunar to teri taKHliq ki tashhir se hai

ये हुनर तो तिरी तख़्लीक़ की तशहीर से है

یہ ہنر تو تری تخلیق کی تشہیر سے ہے

शायर: Daniyal Zaman6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये हुनर तो तिरी तख़्लीक़ की तशहीर से है
कोई दीवार से है और कोई तस्वीर से है

उस के इंकार से ज़िंदान की बू आएगी
उस के लहजे में तवाज़ुन किसी ज़ंजीर से है

आप का और मिरा क्या कोई त’आरुफ़ भी नहीं
जो यहाँ हो रहा है क्या सभी तक़दीर से है

जब तू चमका तो ज़िया बाँटी गई दुनिया में
रौशनी को भी बसारत तिरी तनवीर से है

बाप ने बच्चों को इस तरह निशाँ बतलाए
ये विरासत से मिली और ये शमशीर से है

रब्त-ए-तरतीब की इक शक्ल है जैसे कि 'ज़मान'
नींद को ख़्वाब से है ख़्वाब को ता'बीर से है