उर्दू शायरी · ग़ज़ल

barq-raftar hum bhi dekhte hain

बर्क़-रफ़्तार हम भी देखते हैं

برق رفتار ہم بھی دیکھتے ہیں

शायर: Daniyal Zaman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बर्क़-रफ़्तार हम भी देखते हैं
तू हमें मार हम भी देखते हैं

क्या लिखा है जो पढ़ते रहते हो
आज अख़बार हम भी देखते हैं

इस क़दर मत बुराई की जाए
तेरे बे-कार हम भी देखते हैं

मसअला इस को पार करना है
वर्ना दीवार हम भी देखते हैं

कितना पानी है और कितने अश्क
क्या है मे’यार हम भी देखते हैं

एक भी फ़ाहिशा नहीं मौजूद
ख़ुश्क बाज़ार हम भी देखते हैं

दाएरे को ग़लत बनाएगा
उस का परकार हम भी देखते हैं