उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaan ganwaun ki sar bacha lun main

जाँ गँवाऊँ कि सर बचा लूँ मैं

جاں گنواؤں کہ سر بچا لوں میں

शायर: Daniyal Zaman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाँ गँवाऊँ कि सर बचा लूँ मैं
कोई तलवार तो उठा लूँ मैं

तुम ने फ़ुर्क़त की शब गुज़ारी है
क्यों न वहशत का दिन मना लूँ मैं

हो इजाज़त तो बज़्म-ए-गिर्या में
ग़म हँसूँ दर्द गुनगुना लूँ मैं

एक सूरत मुझे बनानी है
एक सूरत अगर मिटा लूँ मैं

भूक ले आएगी परिंदों को
फेंक दूँ जाल या उठा लूँ मैं

एक आवाज़ ही लगानी है
एक आवाज़ फिर लगा लूँ मैं

रात बेज़ार है तो क्यों न 'ज़मान'
दिल जला लूँ दिया बुझा लूँ मैं