उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye hai kaun si hikayat ye hai kaun sa tarana

ये है कौन सी हिकायत ये है कौन सा तराना

یہ ہے کون سی حکایت یہ ہے کون سا ترانہ

शायर: Urooj Qadri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये है कौन सी हिकायत ये है कौन सा तराना
न शिकायत-ए-ग़म-ए-दिल न हिकायत-ए-ज़माना

वो असर भरी नसीहत वो कलाम-ए-आरिफ़ाना
कि लगा रहा हो जैसे कोई दिल पे ताज़ियाना

जिसे काफ़िरी से रग़बत जिसे ज़ौक़-ए-मुल्हिदाना
उसे क्यूँ पसंद आए रह-ओ-रस्म-ए-मोमिनाना

है सितम की धुंद छाई है जफ़ा की फ़स्ल आई
है चमन पे ऐसा पहरा कि क़फ़स है आशियाना

मुझे याद आ रही हैं तिरी महफ़िलों की बातें
वो शिकायतों का दफ़्तर वो हिकायत-ए-शबाना

तिरे हुक्म से अलग हो तिरे नूर से जुदा हो
मिरी ज़िंदगी में बाक़ी नहीं ऐसा कोई ख़ाना

नज़र-ए-करम से मुझ को कभी देख ले वो शायद
मिरे दिल की आरज़ू है वो जमाल-ए-जावेदाना

है 'उरूज' ये सआ'दत ये है जेल की मसर्रत
कि तिहाड़ में अदा हो तिरी ईद का दोगाना