उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye dip hans ke phir se jalana paDa mujhe

ये दीप हँस के फिर से जलाना पड़ा मुझे

یہ دیپ ہنس کے پھر سے جلانا پڑا مجھے

शायर: Tabassum Zia5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये दीप हँस के फिर से जलाना पड़ा मुझे
दोबारा दिल किसी से लगाना पड़ा मुझे

हाथों से अपने तुम ने जहाँ फूल रक्खा था
ताबूत अपना ख़ुद ही उठाना पड़ा मुझे

जी ऊब ही गया था यूँ तन्हा पड़े पड़े
दुख झेल झेल जान से जाना पड़ा मुझे

ख़ुशबू रची बसी थी तिरे लम्स की जहाँ
घर अपनी ही तपिश से जलाना पड़ा मुझे

मजनूँ मिला था लैला से क़िस्से में जिस जगह
अफ़्साना लिख के ख़ुद वो मिटाना पड़ा मुझे