उर्दू शायरी · ग़ज़ल

guzar gai jo wo sarab si lagi

गुज़र गई जो वो सराब सी लगी

گزر گئی جو وہ سراب سی لگی

शायर: Tabassum Zia5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुज़र गई जो वो सराब सी लगी
ये ज़िंदगी हमें 'अज़ाब सी लगी

सजा लिया है चूम कर लो ताक़ पर
कहानी 'इश्क़ की किताब सी लगी

ये सोचती हैं लहरें चाँद लेंगी छू
ये बात क़ुर्बतों की ख़्वाब सी लगी

निकलता हूँ मकाँ से सिर्फ़ रात को
हाँ रौशनी भी अब हिसाब सी लगी

भरोसा कीजे हम पे एक मर्तबा
ये आरज़ू बड़ी ख़राब सी लगी