उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye chhoTa sa makan baghiya lagane kaun deta hai

ये छोटा सा मकाँ बग़िया लगाने कौन देता है

یہ چھوٹا سا مکاں بغیا لگانے کون دیتا ہے

शायर: Parveen Kaif7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये छोटा सा मकाँ बग़िया लगाने कौन देता है
दर-ओ-दीवार पर सब्ज़ा उगाने कौन देता है

कभी नाज़ाँ थे हम आँसू बहाने कौन देता है
मगर ऐ चश्म-ए-नम अब मुस्कुराने कौन देता है

मिरी आँखों को ये सपने सुहाने कौन देता है
वो आएगा दिलासे दिल को जाने कौन देता है

पता चलता है कैसे मेरे उन के छुप के मिलने का
ख़बर तुझ को हमारी ऐ ज़माने कौन देता है

नहीं आना नहीं आना यही ज़िद है यही ज़िद है
वो आ तो जाएँ फिर देखूँ कि जाने कौन देता है

तुम्हें दिल में बसा रखा है मेरी सादगी देखो
ज़माने में किसी को सर छुपाने कौन देता है

ख़ुद अपने दिल से कह लेते हैं तन्हाई में ग़म अपना
तुम्हारे सामने दुखड़े सुनाने कौन देता है