उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bas gaya hai wo chand par ja kar

बस गया है वो चाँद पर जा कर

بس گیا ہے وہ چاند پر جا کر

शायर: Parveen Kaif7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बस गया है वो चाँद पर जा कर
आओ मिलते हैं उस के घर जा कर

रुख़ बदल कर क़रीब से गुज़रा
बात की उस ने दूर-तर जा कर

वही माहौल है वही कोहराम
हम ने देखा नगर नगर जा कर

तुम को जाने तो दूँ सवाल ये है
आए वापस न तुम अगर जा कर

वही चेहरा था शाहकार-ए-अज़ल
बस वहीं रुक गई नज़र जा कर

आसमाँ है हमारे पावँ तले
क्यों ज़मीं से लगे न सर जा कर

अपने आँगन को कह रहे हो उजाड़
देख आए हो किस का घर जा कर