उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye bhul jao ki Dar jaegi meri KHushbu

ये भूल जाओ कि डर जाएगी मिरी ख़ुशबू

یہ بھول جاؤ کہ ڈر جائے گی مری خوشبو

शायर: Raakesh ulfat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये भूल जाओ कि डर जाएगी मिरी ख़ुशबू
हर एक सम्त को महकाएगी मिरी ख़ुशबू

यहाँ वहाँ ये उड़ेगी पर अपनी मर्ज़ी से
हवा के रुख़ से न घबराएगी मिरी ख़ुशबू

मैं अपने बाग़ में जब फूल बन के महकूँगा
तुम्हारे तक भी पहुँच जाएगी मिरी ख़ुशबू

ये तितलियाँ कोई तूफ़ाँ बिखेर दे वर्ना
इसी क़फ़स में सिमट जाएगी मिरी ख़ुशबू

मुझे भी वक़्त की आँधी का इल्म है 'उल्फ़त'
मगर ये सच है कि याद आएगी मिरी ख़ुशबू