उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDi hasin thi wo raat kaise nind aati

बड़ी हसीन थी वो रात कैसे नींद आती

بڑی حسین تھی وہ رات کیسے نیند آتی

शायर: Raakesh ulfat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बड़ी हसीन थी वो रात कैसे नींद आती
तू मुझ से दूर थी दो हाथ कैसे नींद आती

तिरी जुदाई के जैसे कई जुगों के बा'द
मुझे मिली थी वो इक रात कैसे नींद आती

निगाहें बोल रही थीं दिलों के अफ़्साने
यूँ अपनी हो रही थी बात कैसे नींद आती

तिरे लबों को कभी तेरे गाल छूता रहा
जब ऐसे कट रही थी रात कैसे नींद आती

वो रात मेरे लिए कोई आम रात न थी
तिरे मिलन की थी वो रात कैसे नींद आती

तमाम रात हम इक दूसरे को तकते रहे
हमारे जागे थे जज़्बात कैसे नींद आती

मैं कैसे जाग रहा था मुझे ये हैरत थी
मुझे तो ये था बस इक रात कैसे नींद आती