उर्दू शायरी · ग़ज़ल

charagh le ke hatheli pe chal sakoge kya

चराग़ ले के हथेली पे चल सकोगे क्या

چراغ لے کے ہتھیلی پہ چل سکو گے کیا

शायर: Raakesh ulfat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चराग़ ले के हथेली पे चल सकोगे क्या
घना अंधेरा है बाहर निकल सकोगे क्या

निज़ाम बिखरा हुआ है अवाम बे कल है
बनी हुई है जो सूरत बदल सकोगे क्या

तुम्हारे अपने लगे हैं तुम्हें गिराने में
ज़मीं पे तेल लगा है सँभल सकोगे क्या

झुके सरों से ये लगता है बेबसी है कोई
तुम ऐसी हाँ को नहीं में बदल सकोगे क्या

तुम्हें ये नाज़ है 'उल्फ़त' तुम अच्छे इंसाँ हो
मगर ये आग पराई है जल सकोगे क्या