उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye aankh nam thi zaban par magar sawal na tha

ये आँख नम थी ज़बाँ पर मगर सवाल न था

یہ آنکھ نم تھی زباں پر مگر سوال نہ تھا

शायर: Tahira Jabeen Tara5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये आँख नम थी ज़बाँ पर मगर सवाल न था
हम अपनी ज़ात में गुम थे कोई ख़याल न था

सजा लिया है हथेली पे हम ने उस का नाम
इस लिए तो बिछड़ जाने का मलाल न था

अगरचे मो'तबर ठहरे थे हम ज़माने में
हमारे पास तो ऐसा कोई कमाल न था

उसी के साथ थे हम उस से बे-ख़बर रह कर
अगरचे राब्ता उस से कोई बहाल न था

तिरे ही नाम पे ये ज़िंदगी कटी सारी
अगरचे तेरा कभी भी हमें विसाल न था